River Walk

River Walk

River Walk

Then and Now ! Then: The stream giggling from the mountains, into the lap of a sheen valley encountering meadows, and harboring chirping birds, fishes, rodent-controlling snakes, tall trees and glistening grasses; enchanting and taking you towards complete tranquility’. Now: The stream coughs from the hills running into the valley filled with bursting houses ready to choke it up! It now encounters tonne of plastic waste, sewage, excreta leading towards algal blooms, along with those birds, fishes and other plants and animals which are now hard to find near its dying water. But, it’s not late yet! Yakshawati can be transformed into its best form. Being mountainous river it still can clear its water and can again thrive the majestic flora and fauna. All that it need is your undying attention, little concern and immense cooperation to help it survive.

तब और अब ... तब यक्षवती बहती थी, बांज-बुरूंज के जंगलों से और पसर जाती थी, नीचे की उन घाटियों में, जहाँ उसकी साथी होती थी, वो अनगिनत मछलियाँ, तितलियाँ और चिड़ियाये | इसी गाड़ के किनारे होते थे, वो साफ़ करीने से कटे वो उपजाऊ खेत, जिनके किनारों मिलते थे , चूहों की खोदी मिट्टी के टीले और साथ ही दिखती थी, धामन (Rat Snake) की केंचुली ... सामंजस्य, एक दुसरे के पूरक .. सही सही सा .. अब, यक्षवती , रे गाड़ होती हूई ठुली गाड़ बन जाती है, जो अपने साथ लाखों टन प्लास्टिक (हर तरह का) और मल बहा ले जाती है | पर अब कई बार ये बूढी आमा की तरह, थक जाती है, रुक जाती है, साँसे अटक जाती हैं, और फिर ये धीरे-धीरे बहती है | इसके साथी कहीं छूट गए हैं, इसका काई लगा पानी अब बू मारता है | ये सब बड़ा दुःखद है, पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि, पहाड़ी नदियों खुद को साफ़ करना जानती हैं | और यदि इस मरती हूई गाड़ के साथ कुछ प्रयास किये जाए, तो जरूर ही, यह अपने पुराने रूप में बहने लगेगी | ऐसे हैं उम्मीद है, इन कुछ लोगों से जो इस मरती हूई गाड़ को अपना मानते हैं, और यक्षवती के साथ ही अपना भविष्य देखते हैं |

Photo | Gallery